PM Vishwakarma Yojana Kya Hai

Pradeep Chauhan
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प्रस्तावना

भारत एक ऐसा देश है जहाँ सदियों से पारंपरिक कारीगरी और हस्तशिल्प का गौरव रहा है — लकड़हारा, सुनार, दर्जी, धोबी, नाई, लोहार, कुलारी आदि अनेक कारीगर-व्यवसायों में परिवार-पारंपरिक रूप से लोग काम करते आए हैं। लेकिन आधुनिकता, उद्योगीकरण और बड़े पैमाने पर उत्पादन से इन पारंपरिक कारीगरों को अपने हुनर और जीविका के सही मूल्य प्राप्त नहीं हो पाता।

ऐसे में यदि सरकार ऐसे कारीगरों की क्षमता को पहचान कर उन्हें आर्थिक, तकनीकी व सामाजिक रूप से सशक्त करे — तो न सिर्फ उनकी आजीविका सुरक्षित होगी, बल्कि देश की हस्तशिल्प-परंपरा भी फल–फूल सकेगी। इसी लक्ष्य को सामने रखते हुए सितंबर 2023 में केंद्र सरकार ने PM विश्वकर्मा योजना शुरू की। इस ब्लॉग में हम देखेंगे — इस योजना का उद्देश्य, लाभ, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, फायदे, सीमाएँ, और किस तरह आप या आपका जान-पहचान इसका लाभ उठा सकते हैं।


1. PM विश्वकर्मा योजना क्या है?

  • पूरा नाम: प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना (PM Vishwakarma Scheme) (Drishti IAS)

  • शुरुआत: 17 सितंबर 2023 को केंद्र सरकार ने यह योजना लागू की। (Google Translate)

  • किसने लॉन्च किया: Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises (MSME) द्वारा। (PM Vishwakarma)

  • लक्ष्य: पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों (artisans / craftspeople) को “विश्वकर्मा” पहचान देना, उनके कौशल को उन्नत करना, स्वरोजगार तथा स्वरोजगार-आधारित उद्यम को बढ़ावा देना। (PM Vishwakarma)

यानी, जिन लोगों का काम हाथों और पारंपरिक औजारों से जुड़ा है — उन्हें सशक्त बनाने की यह केंद्र सरकार की एक पहल है, ताकि वे आधुनिक बाजार की मांग के अनुसार खुद को ढाल सकें, बेहतर संभावनाएं पा सकें, और उनकी आजीविका में सुधार हो।


2. योजना के प्रमुख उद्देश्य

PM विश्वकर्मा योजना के मुख्य उद्देश्य इस प्रकार हैं:

  • पारंपरिक कारीगरों / शिल्पकारों को “विश्वकर्मा” के रूप में औपचारिक पहचान देना — ताकि वे योजना के तहत मिलने वाले लाभों के पात्र हों। (PM Vishwakarma)

  • उनके कौशल (skills) को आधुनिक और बाजार-अनुकूल बनाना — बुनियादी और उन्नत प्रशिक्षण (skill upgradation / training) देना। (NSDC)

  • स्वरोजगार और स्वरोजगार-आधारित उद्यम (self-employment / enterprise) को बढ़ावा देना — जिससे पारंपरिक कामगारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो। (SIDBI)

  • पारंपरिक उत्पादों / सेवाओं को बेहतर गुणवत्ता, आधुनिक औजार और बाजार पहुँच प्रदान करना — ताकि उनकी कारीगरी को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थान मिल सके। (Drishti IAS)

  • सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़े, वंचित, अल्पसंक्यक, ग्रामीण/पहाड़ी/द्वीपीय क्षेत्रों, दलित-आदिवासी, दिव्यांग, ट्रांसजेंडर आदि समूहों की मदद — ताकि समावेशी विकास सुनिश्चित हो। (Press Information Bureau)


3. कौन-कौन पात्र हैं? (Eligibility / पात्रता)

योजना का लाभ उन्हीं लोगों को मिलता है जो निम्नलिखित शर्तें पूरी करते हों:

  • आवेदक भारत का निवासी हो। (Google Translate)

  • न्यूनतम आयु 18 वर्ष हो। (Google Translate)

  • स्वरोजगार आधारित असंगठित क्षेत्र (unorganized / informal sector) में होने वाला पारंपरिक व्यवसाय / कारीगरी करें। (Drishti IAS)

  • योजना द्वारा निर्धारित 18 पारंपरिक (family-based) ट्रेड्स में से कोई एक हो — जैसे दर्जी, धोबी, सुनार, लोहार, बढ़ई, टाइलर, नाई, कुम्हार, बर्तन बनाने वाला, टोकरी–चटाई बनाने वाला, तोयमेकिंग, फूल / माला बनाने वाला, जूता/चप्पल बनाने वाला, मछुआरा आदि। (Drishti IAS)

  • यदि पहले से किसी अन्य केंद्र / राज्य सरकार की स्किल डेवलपमेंट योजना (skill-development / subsidy scheme) का लाभ ले रहे हों, तो यह योजना में शामिल नहीं हो सकते। (ABP News)

नोट: केवल पारंपरिक कारीगर/हस्तशिल्पी ही पात्र हैं; यदि कोई व्यक्ति आधुनिक व्यवसाय, गैर-हस्तशिल्प, या अन्य गैर-लक्षित क्षेत्र में काम करता है, तो इसे लाभ नहीं मिलेगा। (Google Translate)


4. योजना के लाभ (Benefits / फायदे)

PM विश्वकर्मा योजना के तहत कई प्रकार के लाभ मिलते हैं — जो पारंपरिक कारीगरों को आर्थिक, सामाजिक व कौशल-दृष्टि से मजबूत बनाते हैं।

🎯 मुख्‍य लाभ

  1. कौशल उन्नयन (Skill Upgradation / Training):

    • Basic Training: 5–7 दिन का प्रशिक्षण। (Google Translate)

    • Advanced Training: 15 दिन या उससे अधिक प्रशिक्षण। (Google Translate)

    • प्रशिक्षण के दौरान प्रतिदिन ₹ 500 तक भत्ता (stipend) मिलता है। (Google Translate)

  2. टूलकिट सहायता (Toolkit Assistance):

    • प्रशिक्षण शुरू होने पर, कारीगरों को लगभग ₹ 15,000 का सहायता (voucher / grant) दिया जाता है, जिससे वे उपकरण, औजार आदि खरीद सकें। (Google Translate)

  3. ऋण सुविधा (Credit / Loan Support):

    • बिना गारंटी (collateral-free) या आसान शर्तों पर ₹ 3,00,000 तक लोन उपलब्ध। (Google Translate)

    • ब्याज दर बेहद कम — लगभग 5% वार्षिक। (Paisabazaar)

    • लोन का प्रथम किस्त (initial) ₹ 1 लाख तक मिल सकता है — और जरूरत अनुसार आगे ₹ 2 लाख तक। (mint)

  4. मान्यता एवं पहचान (Recognition & Identity):

    • योजना से रजिस्टर्ड कारीगरों / शिल्पकारों को “विश्वकर्मा प्रमाण पत्र (PM Vishwakarma Certificate)” और ID Card मिलता है। (Google Translate)

    • यह पहचान उन्हें औपचारिक रूप से स्थापित करती है — जिससे भविष्य में अन्य योजनाओं, लोन, मार्केटिंग आदि में मदद मिल सकती है। (PM Vishwakarma)

  5. स्वरोजगार व उद्यमिता प्रोत्साहन (Self-employment / Enterprise Promotion):

    • शिक्षित और प्रशिक्षित कारीगर अपने हुनर के अनुसार व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।

    • आधुनिक उपकरण + कौशल + लोन + बाजार तक पहुँच — इन सब से उनकी आजीविका में सुधार व विस्तार संभव। (SIDBI)

  6. समाज के पिछड़े वर्गों, वंचितों व अल्प-संख्यकों के लिए प्राथमिकता (Inclusive Focus):

    • महिलाओं, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़े वर्ग (OBC), दिव्यांग, ट्रांसजेंडर, नीक-पीछड़े, पहाड़ी/द्वीपीय/दूर-दराज क्षेत्रों के निवासियों को शामिल करने की पहल। (Press Information Bureau)

    • इससे सामाजिक न्याय और आर्थिक समावेशन को बल मिलता है।

  7. बाज़ार व विपणन (Market & Marketing Support):

    • भविष्य में सरकार विपणन सहायता (marketing support), ब्रांडिंग, उत्पादों की मार्केटिंग, आधुनिक पैकेजिंग आदि की सुविधाएँ देने की योजना बना रही है। (SIDBI)


5. PM विश्वकर्मा योजना — आवेदन कैसे करें? (How to Apply)

यदि आप इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए चरणों का पालन करें:

  1. सबसे पहले, योजना की आधिकारिक वेबसाइट (portal) पर जाएँ — [pmvishwakarma.gov.in] (PM Vishwakarma)

  2. “रजिस्ट्रेशन (Registration)” विकल्प पर क्लिक करें। (nssmu.in)

  3. अपना विवरण भरें — नाम, पता, आयु, व्यवसाय (trade), आदि भरें। साथ ही आवश्यकता अनुसार दस्तावेज़ अपलोड करें। आमतौर पर जिन दस्तावेजों की मांग होती है — आधार कार्ड, जाति/पेशा प्रमाण पत्र, बैंक खाता विवरण, पासपोर्ट साइज फोटो, मोबाइल नंबर आदि। (nssmu.in)

  4. पंजीकरण फॉर्म भरने के बाद सबमिट करें। यदि आपका आवेदन पूरी तरह नए नियमों अनुसार योग्य पाया गया — आपको “विश्वकर्मा प्रमाण पत्र + ID Card” मिल जाएगा। (Google Translate)

  5. इसके बाद आप training के लिए चुने जा सकते हैं। training के दौरान stipend मिलेगा, और training पूरी होने पर toolkit व अन्य सहायता मिलेगी। (Google Translate)

  6. यदि आप व्यवसाय बढ़ाना चाहते हैं — तो लोन हेतु आवेदन करें। बैंक/ऋणदाता संस्थाओं के माध्यम से 3 लाख रुपये तक लोन उपलब्ध है। (Google Translate)

टिप: कई बार आवेदन में मदद के लिए नजदीकी CSC (Common Service Centre) या सरकारी सहायता केंद्र मदद करते हैं। यदि आप कम्प्यूटर/इंटरनेट से परिचित नहीं हैं, तो ऐसे किसी केंद्र से संपर्क करना बेहतर रहेगा। (mint)


6. योजना की सीमाएँ / चुनौतियाँ (Limitations / Challenges)

हालाँकि PM विश्वकर्मा योजना बहुत लाभकारी है, फिर भी कुछ चुनौतियाँ और सीमाएँ सामने आ रही हैं — जिन्हें जानना भी ज़रूरी है:

  • कुछ मामलों में लोन दिलाना आसान नहीं — क्योंकि बैंक/ऋणदाता संस्था नए कारीगरों को बिना अनुभव या पूर्व इतिहास के लोन देने में हिचकिचाती है। (The Times of India)

  • प्रशिक्षण और औजार वितरण की प्रक्रिया में देरी या जटिलताएं — कुछ जगहों पर प्रशिक्षण केंद्रों की कमी, ट्रेनिंग सुविधाओं का अभाव या यात्रा की आवश्यकता होती है। (The Times of India)

  • डिजिटल लेन-देन या पहचान (Aadhaar-bank linking) में दिक्कत — कुछ लोगों के लिए बैंक खाता, आधार, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन आदि समस्याएं आती हैं। (The Times of India)

  • यदि कारीगर पहले से किसी अन्य स्कीम (skill-development, subsidy आदि) का लाभ ले रहा हो — तो इस योजना में शन्सक नहीं हो सकते। (ABP News)

  • Awareness की कमी — बहुत से कारीगरों को यह जानकारी नहीं मिल पाती कि इस तरह की योजना है; पश्चात जागरूकता की जरूरत है।


7. किसे करना चाहिए आवेदन — आपकी समीक्षा (Who should apply / क्यों करें आवेदन)

अगर आप या आपके परिवार में कोई नीचे दिए गए समूह से संबंधित है, तो निश्चित रूप से आवेदन करना चाहिए:

  • पारंपरिक कारीगरी / हस्तशिल्प (जूता–चप्पल बनाना, बढ़ई, कुशन–टोकरी–मटका बनाना, सुनार, लोहार, धोबी, दर्जी, मछुआरा, नाई आदि) करता हो।

  • आजीविका स्वरोजगार (self-employment) पर आधारित हो, या अपना छोटा व्यवसाय करना चाहे।

  • आधुनिक उपकरण या निवेश के अभाव में हो — लेकिन हुनर व काम करने की इच्छा हो।

  • बैंक लोन लेना चाहता हो, लेकिन उच्च ब्याज/गिरवी (collateral) से डरता हो।

  • अपने काम को आगे बढ़ाना चाहता हो — बेहतर गुणवत्ता के साथ, आधुनिक तरीके से, बाजार-अनुकूल।


8. आपके लाभ — क्यों यह योजना आपके लिए उपयोगी हो सकती है

  • बिना गारंटी / कम ब्याज दर पर लोन — जिससे छोटे व्यवसाय की शुरुआत हो सके।

  • मुफ्त प्रशिक्षण व वैध पहचान — जिससे आपका काम formal हो जाएगा, भरोसा बढ़ेगा।

  • मुफ्त औजार / टूलकिट — बिना शुरुआती निवेश के शुरुआत संभव।

  • स्वरोजगार + स्वाभिमान — आप अपने हुनर से आजीविका कमाएंगे, किसी कंपनी/नियोक्ता पर निर्भर नहीं रहेंगे।

  • पारंपरिक कला/हुनर का संरक्षण — आपकी कारीगरी आगे बढ़ेगी, अगली पीढ़ी को भी मौका मिलेगा।

  • महिलाओं, वंचितों, पिछड़े वर्गों के लिए विशेष अवसर — जिससे समाज में समानता व आर्थिक सशक्तिकरण बढ़ेगा।


9. (यदि आप राजस्थान या अपने इलाके में सोच रहे हैं) — स्थानीय सुझाव

चूंकि आप राजस्थान (जैसे कि जोधपुर) से हैं — इसलिए:

  • राजस्थान में पारंपरिक कारीगरी (बुनियादी लकड़ी–काम, जूता–चप्पल, हथकरघा, बॉम्बे, मिट्टी की कलाकृतियाँ आदि) अभी भी प्रचलित है। ये लोग इस योजना के लिए अच्छा उम्मीदवार हो सकते हैं।

  • स्थानीय CSC केंद्र, पंचायत कार्यालय या जिला MSME कार्यालय से संपर्क कर आवेदन करें। दस्तावेज व बैंक खाता/Aadhaar लिंक पहले से तैयार रखें।

  • यदि परिवार में कई सदस्य हस्तशिल्प से जुड़े हों — एक-एक सदस्य आवेदन कर सकता है। इससे लोन, टूलकिट, प्रशिक्षण आदि कई परिवारों के लिए सहायक हो सकते हैं।

  • योजना के तहत मिलने वाले टूलकिट और लोन से आधुनिक (बढ़िया) उपकरण खरीदें — जिससे आप बेहतर काम कर सकें, गुणवत्ता बढ़े, और बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकें।

  • स्थानीय बाजार, मेले, हस्तशिल्प बाज़ार, online प्लेटफार्म (जैसे handicraft-marketplace या e-commerce) से अपने उत्पाद बेचने का प्रयास करें — योजना की मार्केटिंग/ मार्केट सपोर्ट की प्रणाली आने पर लाभ उठाने के लिए तैयार रहें।


10. निष्कर्ष (Conclusion)

PM विश्वकर्मा योजना एक बड़ा कदम है — उन हजारों पारंपरिक कारीगरों व शिल्पकारों की पहचान, सम्मान, और आत्मनिर्भरता के लिए। यह सिर्फ एक “सरकारी अनुदान योजना” नहीं है, बल्कि हुनर व कला को आधुनिक दौर में बचाए रखने, रोजगार व स्वरोजगार को बढ़ावा देने, और सामाजिक-आर्थिक समावेशन का माध्यम है।

यदि आप पात्र हैं, तो इस योजना का लाभ उठाना न भूलें — क्योंकि यह आपके आजीविका, काम की गुणवत्ता, आर्थिक स्थिति और भविष्य दोनों के लिए अच्छा अवसर है।

इस ब्लॉग पोस्ट को पढ़ने के बाद अगर आप (या आपके परिचित) आवेदन करना चाहते हों, तो नीचे दी गई FAQs पढ़ें — शायद आपकी शंकाएं दूर हो जाएँ।


11. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ — Frequently Asked Questions)

Q1. PM विश्वकर्मा योजना किसके लिए है?
Answer: यह योजना उन पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों (artisans / craftspeople) के लिए है, जो असंगठित क्षेत्र (informal/unorganized sector) में स्वरोजगार या पारंपरिक कारीगरी करते हैं, जैसे बढ़ई, सुनार, दर्जी, धोबी, नाई, कुम्हार, जूता–चप्पल निर्मात आदि — और यदि वे योजना द्वारा निर्धारित ट्रेड्स (18 पारंपरिक व्यवसाय) में से किसी में कार्यरत हों। (Drishti IAS)

Q2. न्यूनतम आयु क्या होनी चाहिए आवेदन के लिए?
Answer: आवेदन करने के लिए कम-से-कम 18 वर्ष की आयु होनी चाहिए। (Google Translate)

Q3. मुझे क्या-क्या लाभ मिलेंगे?
Answer: आपको मुफ्त कौशल प्रशिक्षण (skill upgradation), रोज़ाना ₹ 500 का stipend प्रशिक्षण के दौरान, प्रशिक्षिण के बाद ₹ 15,000 का टूलकिट सहायता, 5% ब्याज दर पर 3 लाख रुपये तक लोन (स्वरोजगार/व्यवसाय के लिए), और “विश्वकर्मा” प्रमाण पत्र + ID Card मिलेगा। (Google Translate)

Q4. लोन कितना मिलेगा और ब्याज दर क्या है?
Answer: योजना के तहत ₹ 3,00,000 तक लोन लेने का विकल्प है, ब्याज दर लगभग 5% प्रति वर्ष है। 初期 रूप से ₹ 1 लाख, और जरूरत पड़ने पर आगे ₹ 2 लाख तक सुविधा मिल सकती है। (Paisabazaar)

Q5. आवेदन कैसे करना होगा?
Answer: आधिकारिक पोर्टल (pmvishwakarma.gov.in) पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करें या अपने नजदीकी CSC (Common Service Centre) / पंचायत / जिला MSME कार्यालय से संपर्क करें। फॉर्म भरें, आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें — जैसे आधार कार्ड, जाति/व्यवसाय प्रमाण पत्र, बैंक खाता विवरण आदि। (PM Vishwakarma)

Q6. क्या योजना उन लोगों के लिए है जो आधुनिक व्यवसाय करते हैं?
Answer: नहीं। यह योजना केवल 18 पारंपरिक व्यवसायों/कारीगरी (traditional trades / craftsmanship) से जुड़े असंगठित क्षेत्र के कारीगरों, शिल्पकारों के लिए है। आधुनिक व्यवसाय, फैक्ट्री, गैर-हस्तशिल्प या बड़े औद्योगिक व्यवसाय इसे लाभ नहीं ले सकते। (Drishti IAS)

Q7. क्या लोन लेने के लिए गारंटी चाहिए?
Answer: इस योजना के अंतर्गत लोन के लिए आमतौर पर गारंटी/गिरवी (collateral) की आवश्यकता नहीं होती — यह लोन collateral-free हो सकता है या आसान शर्तों वाला है। (Google Translate)

Q8. मैं पहले से किसी अन्य स्किल–डीवलपमेंट योजना से जुड़ा हूँ — क्या फिर मैं आवेदन कर सकता हूँ?
Answer: यदि आप पहले से किसी अन्य केंद्र या राज्य सरकार की स्किल-डेवलपमेंट या सब्सिडी योजना का लाभ ले रहे हों, तो इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। (ABP News)


12. मेरा सुझाव — आपका अगला कदम

यदि आप पारंपरिक कारीगरी करते हैं —

  • अभी अपने आस-पास के नजदीकी CSC या जिला MSME कार्यालय से संपर्क करें।

  • अपने दस्तावेज (आधार, जाति / व्यवसाय / निवास प्रमाण पत्र, बैंक खाता विवरण) तैयार रखें।

  • ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करें या CSC से मदद लें।

  • ट्रेनिंग पाएँ — और उसे गंभीरता से लें, ताकि आपको व वास्तविक कौशल मिले।

  • टूलकिट व लोन लेकर, अच्छे उपकरण व संसाधन खरीदें, अपने काम को सुधारें।

  • यदि संभव हो, अपने उत्पादों / हस्तशिल्प को बाज़ार — स्थानीय बाजार, मेले, या ऑनलाइन प्लेटफ़ार्म पर बेचने की तैयारी करें।

  • अन्य कारीगरों के साथ मिलकर समूह या संघ बनाएँ — इससे विपणन, साझेदारी, उत्पादन व बिक्री में लाभ हो सकता है।


13. समापन (Final Thoughts)

PM विश्वकर्मा योजना केवल एक सरकारी स्कीम नहीं है — यह पारंपरिक कारीगरी, हुनर, और स्वाभिमान से जुड़ी पहल है। यह योजना उन लोगों के लिए वरदान है, जिन्होंने अपनी मेहनत व हुनर से जीवन जिया है, लेकिन संसाधनों, आधुनिक उपकरणों और अवसरों की कमी के कारण आगे बढ़ नहीं पाए। यदि आपका काम पारंपरिक है — तो यह समय है, इस योजना का लाभ उठाने का।

सरकार द्वारा दी गई मदद + आपका समर्पण + आपके हुनर — मिलकर आपका जीवन बदल सकते हैं।

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